श्रीमद्भगवद्गीता योग सिखाना के दो आयाम हैं इसके कई लाभ हैं जैसे पहला तो हमें लाभ मिलता है कि हमारा जीवन स्वयं उन्नत होता जाता है हम स्वरूप की ओर अग्रसर जाते हैं और दूसरों को भी आत्मोन्नति के मार्ग पर और शरीर स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देने का कार्य करते हैं जो प्रसन्न योग योग को सिखा रहा है दूसरों को उसको तो स्वास्थ्य लाभ मिलेगा ही लेकिन साथ ही साथ वह दूसरों को भी स्वास्थ्य लाभ करा देगा योग शिक्षक खुद में एक आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उनकी संचार कौशल का विकास होता है और अपने मन को और अपनी उर्जा को वह विकसित कर पाते हैं सबसे मुख्य बात है की हम योग के माध्यम से तनाव से दूर हो जाते हैं तनाव को खत्म कर पाते हैं और अपने भीतर के आनंद को अनुभव कर पाते हैं और हम जीवन का आनंद ले पाते हैं जैसा भगवान बुद्ध ने संपूर्ण संसार को एक मध्यम मार्ग जिसे अष्टांगिक मार्ग भी कहते हैं का को दिया संपूर्ण भविष्य संपूर्ण विश्व एक शांति के मार्ग पर निकल पड़ा भगवान बुद्ध का विश्व शांति में एक अहम योगदान है
जैसे जैसे आप योग शिक्षक और साधक योग साधकों और योग शिक्षकों का मुख्य दिया होता है कि जब वह लोग किस सिखा रहे हैं जो वायुमंडल है परवेश है उसे शांत शांत और शुद्ध बना देते हैं एनसीईआरटी होगा टेक
No comments:
Post a Comment