महायोगी गुरु गोरखनाथ के ग्रंथ सिद्ध सिद्धांत पद्धति में कर्म के 5 गुणों की चर्चा प्रथम उपदेश में 63 वें श्लोक में की गई है।
1.शुभम्
2.अशुभम्
3.यशः
4. अपकीर्ति
5.अदृष्टि फल साधनम्
प्रथम कर्म है शुभ अज्ञान कर्म एवं स्वर्ग आदि प्राप्त सत्कर्म ही शुभ है।
लोक एवम वेद शास्त्र में निंदित असत्य आप प्रेरित कर्म अशुभ कहलाते हैं।
शुभ कर्मों से यश बढ़ता है।
कर्म का चतुर्थ रूप कृति है अशुभ कर्मों से व्यक्ति को आकृति मिलती है।
कर्म का पंचम रूप दृष्ट फल साधन है जिन कर्मों के फल चर्म चक्षु इंद्रिय जन्य ज्ञान के लिए अप्रत्यक्ष होते हैं वह अदृष्ट फल साधन कहे जाते हैं।
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