सिद्ध सिद्धांत पद्धति ग्रंथ गुरु गोरखनाथ के उद्देश्यों का संकलन है इसमें कुल उपदेश है पहला उपदेश पिंडोत्पत्ति है।
शरीर उत्पत्ति का निरूपण सर्वप्रथम गुरु गोरखनाथ ने भगवान आदिनाथ को प्रणाम करके सिद्धांत पद्धति को उपदेश देना आरंभ किया है।
अंड एवं पिंड के उत्पत्ति विचार काऔचित्य
यद्यपि सत्य विचार में अंडे एवं पिंड की उत्पत्ति का निरूपण बहुत आवश्यक नहीं है तथा श्लोक संग्रह को ध्यान में रखकर के अंड और पिंड पंडित मत सिद्ध मत में यानी सिद्धों के अनुभव में प्रकाशित है उसका इस पद्धति में पिंड की उत्पत्ति पिंड का विचार पिंड का सम्यक ज्ञान पिंड का आधार पिंड पद समरस भाव एवं श्री नित्या अवधूत इस प्रकार उपदेशों में विस्तृत वर्णन है
अव्यक्त एवं नाम रहित परब्रह्म
जब सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व ना कोई कर्ता है ना कार्य के अभाव में कारण ना कुल शद क्रम या
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