Friday, September 28, 2018

परब्रह्म की आदिम 5 शक्तियां एवं उनके गुण

अनामा परा शक्ति अपरा शक्ति सूक्ष्म आ सकती कुंडलिनी शक्ति परब्रह्म की पांच आदिम शक्तियां हैं अनामा नाम रहित है स्वयमेव अभिव्यक्त है अनादि काल से सिद्ध है वह एकमात्र सत्य है वह जन्म एवं मृत्यु से रहित है सिद्ध योगियों का यह सिद्धांत प्रसिद्ध है अर्थात उनका यह निश्चित मत है कि ब्रह्मा सेंड संवेदना है उस ब्रह्म की नजरों की शक्ति इच्छा मात्र धर्म वाली तथा समस्त जीवो के सुख-दुख आज भूखे विषयों के निमित्त सृष्टि एवं प्रलय काल में संकोच तथा विकास स्वभाव वाली प्रसिद्ध है पर आ सकती निजा सकते सहित उस पर ब्रह्म के केवल मानस औलाद सृष्टि की इच्छा उत्साह मातृशक्ति सम्मेलन जगदीश्वरी जागृत होती है अपरा शक्ति उस परम शिव ब्रह्मा में अधिक पर आसक्त के स्वा विभक्त परब्रह्मा में स्पंदन मात्र से क्रिया प्रधान अपरा शक्ति जागृत होती है यह सृष्टि कर्म में परमेश्वर की सहायक होती है इसे ही हिरण्यगर्भ आदि ना मुझसे जान आ गया है सूक्ष्म आ सकती सृष्टि की रचना की इच्छा वाली शक्ति से उस परम शिव में अहंकार मात्र से मैं श्रेष्ठ रचना में समर्थ हूं सूक्ष्मा शक्ति उत्पन्न होती है कुंडलिनी शक्ति वेदम सभा वाली तत्वज्ञान को दिलाने वाली जोकि योगाभ्यास द्वारा प्रबुद्ध होने पर योगी को मोक्ष प्रदान करने वाली होती है इस महा कुंडल ने के उदय होने पर ही योगी परम शिव का साक्षात्कार कर पाता है

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कयास

 कयास शब्द अरबी भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है    माप