परब्रम्ह की पांच शक्तियां एवं उनके गुण
1.अनामा
2.पराशक्ति
3.अपरा शक्ति
4.सूक्ष्मा शक्ति
5.कुंडलिनी शक्ति
अनामा नाम रहित है स्वयमेव अभिव्यक्त है
पराशक्ति परब्रम्ह के केवल मानस पहलाद श्रेष्ठ की इच्छा उत्साह मात्र से पराशक्ति शिव में लीन जगदीश्वरी जागृत होती है
अपरा शक्ति ब्रह्म में अधिष्ठित पराशक्ति पर ब्रह्मा मैं स्पंदन मात्र से अपरा शक्ति जागृत होती है
सूक्ष्म शक्ति अहंकार मात्र से सृष्टि की रचना में समर्थ है
कुंडलिनी शक्ति तदंतर वेदन स्वभाव तत्व ज्ञान स्वरूप कुंडलिनी शक्ति उदित होती है जो योगाभ्यास द्वारा प्रबुद्ध होने पर योगी को मोक्ष प्रदान करने वाली होती है
No comments:
Post a Comment