ओम श्री सत गुरुदेव भगवान की जय मैं देवेश कुमार आप सभी का अपने ब्लॉग में स्वागत करता हूं मैंने और आपने हम सभी ने जिन्हें योग में अध्यात्म में रूचि है संभव है उन्होंने योग दर्शन को सुना या पढ़ा भी होगा चलिए आप एक नहीं भी पड़े हैं तुम्हें बताता हूं
अब ध्यान से सुनिए महर्षि पतंजलि कहते हैं प्रणव मतलब ओम इस नाम का इस मंत्र का जब करने से और इसी को भैया बना लेने से ईश्वर की भावना का साक्षात्कार होता है
योगियों का जो मन है जो उनकी साधना पद्धति है उसमें वे लोग ओम यानी प्रणव का बारंबार जप करते हैं जो उनके साधना का उनके जीवन का एक अंग बन जाता है इसीलिए हम जब कभी भी योग की शुरुआत करते हैं तो हम ओम का जब करते हैं
वाचस्पति मिश्र ने ॐ के जप पर विचार और भावनात्मक ध्यान करने के लिए बतलाया है यह सब बातें हम आप सभी को ध्यान और प्रार्थना के संदर्भ में बता रहे हैं यह आपको साधना का मार्ग भी सिखाएगा चलिए जब हम गीता में भी देखते हैं तो भगवान श्री कृष्ण ने ॐ के जप पर बल दिया है और किसी तत्वदर्शी महापुरुष के स्वरूप का ध्यान पर बल दिया है जिससे आपके अंदर योग क्रिया जागृत हो सके
No comments:
Post a Comment