Monday, April 20, 2020
Friday, March 27, 2020
जलवायु
भारत की जलवायु को अभिव्यक्त करने वाले शब्द का नाम मानसून है मानसून शब्द अरबी भाषा के मौसिम शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है ,वर्ष भर में हवाओं के प्रतिरूप में होने वाला ऋतु प्रत्यावर्तन ।
भारत की जलवायु उष्ण है।
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख तत्व है।
१ उत्तर भारत में हिमालय पर्वत की उपस्थिति जिसके कारण मध्य एशिया से आने वाली शीतल हवाएं भारत में प्रवेश नहीं कर पाती इस प्रकार भारतीय जलवायु महाद्वीपीय जलवायु का स्वरूप प्राप्त करती है।
२ दक्षिण में हिंद महासागर की उपस्थिति और भूमध्य रेखा से नजदीकी के कारण उष्णकटिबंधीय जलवायु भारत में पाई जाती है।
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
१ भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाला प्रथम कारण भारत की अक्षांश स्थिति है दक्षिण भारत भूमध्य रेखा से अधिक निकट है जिस कारण से भारत में वर्ष भर गर्म जलवायु पाई जाती है उत्तरी भारत कर्क रेखा के ऊपर में स्थित होने के कारण शरद ऋतु में ठंडी और ग्रीष्म ऋतु में गर्मी पड़ती है पहाड़ी प्रदेशों के भागों में शीत ऋतु में हिमपात होता है।
Wednesday, March 25, 2020
ज्वालामुखी
ज्वालामुखी सामान्यता एक वृत्ताकार क्षेत्र अथवा दरार के रूप में प्रारंभ होता है कुरुक्षेत्र का संबंध भूगर्भ में अति गहराई से रहता है बेकरी उद्योग से इस क्षेत्र की रचना होती है इस क्षेत्र से भीतरी गर्म लावा तत्त्व से उपवास तथा अन्य सेल पदार्थ बाहर निकलते हैं ज्वालामुखी का क्षेत्र खता चितईपुर 100 फुट से अधिक व्यास का होता है इसको प्लाजा ज्वालामुखी नदी कहा जाता है इस नदी के ऊपरी भाग को ज्वालामुखी कहते हैं उद्भेदन के समय ज्वालामुखी से निकला हुआ पदार्थ आसपास जमा होता है जिससे वहां पर उनका निर्माण हो जाता है कभी-कभी यह भी हो सकते हैं ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं कई बार ज्वालामुखी के होते हैं ज्वालामुखी के रूप में मिलते हैं कि नहीं
ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाले पदार्थ
ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाले पदार्थों में ठोस पदार्थ तरल पदार्थ गैस युक्त पदार्थ निकलते हैं
ठोस पदार्थ यस एल खंड वाले होते हैं इनमें सूट मुकड वाले ज्वालामुखी धूल राजा सुपारी के आकार के दाने केक के आकार के कारण इस कोरिया कोरिया का का संगठित रूप ग्रेसिया राख के संगठन के बने टुकड़े तक कई मीटर व्यास के शिलाखंड ज्वालामुखी बम के साथ गैस के बुलबुलों से निर्मित क्षेत्र में प्रदान पझमकयहज्वालामुक्षिप्त कहलाते हैं
Tuesday, March 24, 2020
JOKES IN HINDI
👉👉 आज के युवको को
धार्मिक बनाने का आसान तरीका
मन्दिर और आश्रमों मे फ्री wi fi
👉👉 आज वो भगत कहने लगा की हुक्का मत पिया करो।
मैंने कहा तुझे क्या पता की इसमे तीन देवता निवास करते हैं।
नीचे जल देवता
बीच में पवन देवता
और
ऊपर अग्नि देवता
जाते जाते वो भी दो घूँट मार गया
👉👉 रेलवे TC:- बाबा कहाँ जाओगे ?
साधु बाबा : जहाँ राम का जन्म हुआ था .
TC: टिकट दिखाओ ?
साधु बाबा : नहीं है बच्चा
TC: तो चलो .........
साधु : कहाँ ?
TC: जहाँ कृष्ण का जन्म हुआ था (Jail me )
Monday, March 23, 2020
चीनी ने कोरोना पर कैसे काबू पाया होगा
#चीन_ने_कोरोना_पर_काबू_कैसे_पाया_होगा?
आज जहां सारा विश्व कोरोना वायरस से जूझ रहा है वहीं जिस जगह से इसका प्रारम्भ हुआ वहां पर एक अद्भुत सी शान्ति है। आज इटली में कोरोना की वजह से मरनेवालों की संख्या चीन से अधिक हो चुकी है। मुझे अभी भी यह रहस्यमय सा लग रहा है कि जिस जगह से इस रहस्यमय बीमारी की शुरुआत हुई वहां पर वह केवल इतनी कम संख्या में लोगों को अपना शिकार बना सकी और नियंत्रित हो गई। चीन की जनसंख्या भी बहुत है। जहां तक जानकारी है 17 नवम्बर 2019 को इसका पहला संक्रमण हुआ और दिसम्बर के अन्त में आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा हुई। लगभग 50 दिनों में किस प्रकार से इसका विस्तार केवल वुहान और हुबई प्रांत में सीमित रह गया? इटली में पहला संक्रमित व्यक्ति 31 जनवरी को पकड़ में आया। इन 50 दिनों में इसके फैलने की गति अद्भुत है जबकि हमको ये पता चल चुका था कि इसके विस्तार को कैसे कम किया जा सकता है। मैं तो जब इस बीमारी को फैलने से बचने के लिए की जानेवाली सावधानियों के बारे में पढ़ता हूं तो यही लगता है कि इस वायरस के संक्रमण से बच पाना यदि असम्भव नहीं तो अत्यन्त कठिन अवश्य है। यूं तो बहुत सारे लोगों को चीन में इस बीमारी से मरने वालों की प्रशासनिक स्तर पर सूचित संख्या पर विश्वास नहीं है और मैं भी उनमें से एक हूं। परन्तु संख्या चाहे जो भी रही हो, इतने कम समय में इस को नियंत्रित करने में चीन कैसे सफल हुआ होगा यह बहुत ही आश्चर्यचकित कर देनेवाली घटना है। अभी अमेरिका के विश्लेषक यह आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि हो सकता है कि इस समस्या को नियंत्रित होने में डेढ़ वर्ष तक लग जाएं। कैसे चीन में यह बीमारी नियंत्रण में अाई होगी इसका संकेत युवल नोआ हरारी का आलेख पढ़ने से मिलता है। इस लेख का लिंक कॉमेंट में दिया गया है। मुझे निश्चित रूप से लगता है कि कुछ उसी तरह से यह बीमारी चीन में नियंत्रित हुई होगी। इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए जिस तरह से लोगों को एक दूसरे से विविक्त करने की अत्यन्त आवश्यकता होती है और यह जानने की आवश्यकता होती है कि कौन सा व्यक्ति किस व्यक्ति के सम्पर्क में आया है, वह किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में व्यक्ति की निजता का हनन माना जायेगा। सामान्य परिस्थितियों में कोई भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था उस प्रकार से व्यक्ति की निजता में घुसपैठ करने की अनुमति नहीं दे सकती। चीन में जिस प्रकार की शासन व्यवस्था है उसमें वैयक्तिक स्वतन्त्रता और निजता उस प्रकार से संरक्षित नहीं रहती। लेकिन सरकार के पास हर व्यक्ति की समग्र जानकारी रह पाना आसान होता है। चीनी सरकार के पास असीमित अधिकार हैं जिससे वह जान सके कि कौन व्यक्ति किस किससे मिल रहा है और कहां कहां जा रहा है। उसके लिए मोबाइल नम्बर आदि से लेकर बहुत सारे साधन हो सकते हैं। यह सब कुछ इतना डरावना है कि यह जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास 1984 की याद दिलाता है। हम एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था में रह रहे हैं। सम्भवतः इस संकट से बचाव में लोकतान्त्रिक व्यवस्थाएं उतनी सक्षम नहीं हैं जितनी कि सत्तावादी शासन व्यवस्थाएं। इस संकट के समाप्त होने तक शायद यह दुनिया बहुत कुछ बदल चुकी होगी जैसा कि युवल नोआ हरारी सम्भावना व्यक्त कर रहे हैं। लोगों के लिए तो यही कहना उचित और आवश्यक लगता है कि जितना हो सके दिये गए निर्देशों का पालन करें। हम और आप इस विभीषिका के असली रूप से अभी भी अपरिचित ही हैं।
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