परिचय
योग शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में परिवर्तन लाना और उनको योग को सिखाना है शिक्षक कैसे योग का वातावरण बनाए जिससे शिक्षार्थी स्वयं यौगिक क्रियाओं को योगिक विधियों को सीखें समझे और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।
शिक्षण वह विज्ञान है जिसमें तर्क और परंपरागत रूप से पारंपरिक सिद्धांतों और विद्यार्थी के अनुकूल शिक्षण प्रदान किया जाता है संपूर्ण शैक्षिक माहौल विद्यार्थी के लिए सीखने के लिए उत्तरदाई होता है शिक्षण शिक्षार्थी में नेतृत्व और ज्ञान क्षमता को विकसित करता है।
योग का शिक्षण में सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों का लाभ होता है दोनों अच्छे से अच्छे स्वास्थ्य अच्छी संचार कौशल तथा दोनों शिक्षक और शिक्षार्थी योग के माध्यम से अपने तनाव को दूर कर सकते हैं और एक जीवन में एक आनंद और उत्सव का माहौल पैदा कर सकते हैं और जीवन को एक उत्सव बना सकते हैं योगाभ्यासी और योग शिक्षक एक दूसरे के साथ अपने विचार और भावनाओं को सिखाते हैं प्राचीन योग ग्रंथों में शिक्षण के उपरांत विद्यार्थी स्वयं स्वाध्याय करते थे जो उन्हें आंतरिक शांति प्रदान करता था मैत्री उपनिषद में मोनू को परिभाषित किया गया है हम योग में एक गहरे अंतर्मन में प्रतिष्ठित हो जाते हैं जहां से हम जब हम ध्यान की गहराइयों में जाते हैं तो हम एक नया अनुभव एक नई ऊर्जा से ओतप्रोत हो जाते हैं जब हम सवा संस्कृत अभ्यास करते हैं कुछ देर तक करते हैं तो हम यह देखते हैं कि हम कितनी अच्छे ढंग से रिलैक्स हो चुके हैं और हमारा जो अंग अंग में एक नई ऊर्जा का संचार हो चुका है
योग के शैक्षिक माहौल
योगिक शिक्षण में कक्षा का वातावरण स्वच्छ सुंदर होना चाहिए हमें योग की कक्षाएं प्रदूषण रहित वातावरण में लेनी चाहिए सभी योग साधकों को 6 * 3 का के स्थान की आवश्यकता होती है योग का अभ्यास करने के लिए योग्य क्रियाओं को करने के लिए योगाभ्यासी को अपने आश्रम सिंह ले आनी चाहिए जो विद्युत का कुचालक होगा यह काटन या विद्युत का कुचालक हो।
योगिक शिक्षण के क्रम
संपूर्ण योग शिक्षण का उद्देश्य योगाभ्यासी को शांति का अनुभव कराना होता है उसे एक प्रतिकूल और अनुकूल परिस्थितियों में समत्व के भाव विकसित करने होते हैं
योग करने से पहले हम
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