योगदर्शन के प्रणेता- महर्षि पतंजलि
योगदर्शन में कुल चार पाद है। पाद का अर्थ है"अध्याय"
1. समाधिपाद
2.साधनपाद
3 विभूतिपाद
4 कैवल्यपाद
इस ग्रन्थ में योग का सविस्तार छोटे श्लोक मे वर्णन है।
चित्तवृत्तियों
अष्टांगयोग
क्रियायोग
आदि का वर्णन इसी ग्रन्थ में है।
ॐ
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